प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी : दिल्ली-एनसीआर ही क्यों, पूरे देश को स्वच्छ हवा का हक

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पटाखों पर लगी रोक को जारी रखने के निर्देश

शीर्ष अदालत ने वायु गुणवत्ता नियंत्रण आयोग को दिया नोटिस, मांगा जवाब

उल्लंघन करने वाले राज्यों के खिलाफ अदालत ने दी अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी

नई दिल्ली। पटाखों पर रोक के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर तक ही रोक क्यों हो पूरे देश में क्यों नहीं। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर दिल्ली-एनसीआर के शहरों को स्वच्छ हवा का हक है तो दूसरे शहरों के लोगों को क्यों नहीं। प्रदूषण से निपटने के लिए जो भी नीति हो वो पूरे देश के लिए होनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने ये टिप्पणी दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और भंडारण पर रोक लगाने के 3 अप्रैल के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

कोर्ट ने वायु गुणवत्ता नियंत्रण आयोग को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि 2024 की सर्दियों में जब वो अमृतसर गए थे तो वहां प्रदूषण दिल्ली से भी बदतर था। अगर पटाखों पर रोक लगाना है। तो पूरे देश में लगना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि स्वास्थ्य का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 का एक अनिवार्य हिस्सा है।

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इसअधिकार में प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का अधिकार भी शामिल है। अदालत में सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह ने दलील पेश की। उन्होंने कहा कि कुलीन वर्ग अपना ध्यान रखता है। प्रदूषण होने पर वे दिल्ली से बाहर चले जाते हैं। आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूरी तरह बैन के खिलाफ याचिका पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को नोटिस जारी किया।

इसने दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। 6 मई को दिल्ली-एनसीआरमें पटाखों पर रोक जारी रखते हुए यूपी, राजस्थान और हरियाणा को निर्देश दिया था कि वो दिल्ली- एनसीआर में पटाखों पर लगी रोक को लागू करें। न्यायालय ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर उसके आदेश को लागू नहीं किया गया तो अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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इसके पहले 13 अप्रैल को उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूरी तरह से लगाए प्रतिबंध को सही ठहराया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जब तक ये साबित नहीं हो जाता कि ग्रीन पटाखों से ना के बराबर प्रदूषण होता है, तब तक बैन के पुराने आदेश में बदलाव का कोई औचित्य नजर नहीं आता ।

ये शहर प्रदूषण नियंत्रण में आगे
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में इंदौर, अमरावती और देवास शीर्ष प्रदर्शन करने वाले शहर बनकर उभरे। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि कई शहरों ने औद्योगिक केंद्र होने या कोयला खदानें होने के बावजूद उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने घोषणा की कि अगले वर्ष से शहरों में स्थित वार्ड का भी वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों के लिए मूल्यांकन किया जाएगा।

इसके लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में इंदौर पहले स्थान पर रहा, उसके बाद जबलपुर का स्थान रहा। आगरा और सूरत संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे।

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